26 Sep 2026

TMC के 20 सांसदों का NDA को समर्थन, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपा पत्र

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अब तक की सबसे बड़ी टूट हो चुकी है। दिल्ली में पार्टी के 20 बागी सांसदों ने लोकसभा में अपना एक अलग गुट बनाने का दावा किया है। इस सिलसिले में 14 सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की है।

DB News
08 Jun 2026 02:02 PM
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पश्चिम बंगाल के राजनैतिक इतिहास में आज का दिन सबसे बड़े उलटफेर के तौर पर दर्ज होने जा रहा है। एक तरफ जहां दिल्ली में विपक्षी दलों की इंडिया ब्लॉक की बैठक चल रही है, वहीं दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस का पूरा संसदीय ढांचा ताश के पत्तों की तरह बिखर गया है। टीएमसी के भीतर सुलग रही असंतोष की आग अब पूरी तरह से विभाजन के रूप में सामने आ चुकी है।
 

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब एक बड़े सियासी तूफान में बदल चुकी है। पार्टी की सीनियर सांसद और लोकसभा में चीफ व्हिप काकोली घोष दस्तीदार ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि TMC के करीब 20 सांसदों ने एनडीए (NDA) को समर्थन देने का मन बना लिया है। काकोली घोष दस्तीदार के मुताबिक, खुद उनके समेत लगभग 20 सांसदों ने इस फैसले की जानकारी देते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र भी भेज दिया है।

दलबदल कानून से बचने का फॉर्मूला और लोकसभा का आंकड़ा
लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 28 सांसद हैं। भारतीय संसदीय नियमों के अनुसार, दलबदल कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए किसी भी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सांसदों का अलग होना अनिवार्य होता है, जिसकी संख्या टीएमसी के मामले में 19 होती है। बागी गुट ने दावा किया है कि उनके साथ कुल 20 सांसद आ चुके हैं, जो कानूनी रूप से पार्टी को तोड़ने के लिए पर्याप्त हैं।

यह बागी गुट बहुत जल्द लोकसभा अध्यक्ष को मिलकर अपने इस ऐतिहासिक फैसले की आधिकारिक जानकारी सौंपने वाला है। हालांकि, वर्तमान में लोकसभा स्पीकर दिल्ली में मौजूद न होकर चंडीगढ़ के दौरे पर हैं, इसलिए उनके लौटते ही यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती और काहोली घोष का नाम
इस विभाजन के पीछे की सबसे बड़ी वजह पार्टी के भीतर अभिषेक बनर्जी के बढ़ते एकाधिकार और उनके काम करने के तौर-तरीकों को लेकर नाराजगी बताई जा रही है। बागी सांसदों ने खुलकर एलान कर दिया है कि वे अब लोकसभा में अभिषेक बनर्जी को अपना नेता मानने के लिए कतई तैयार नहीं हैं।
 

इसके बजाय बागी धड़े ने वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार को संसद के निचले सदन में अपना नया नेता चुनने का फैसला किया है। सांसदों का कहना है कि पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेताओं की लगातार अनदेखी की जा रही थी, जिसके बाद उन्हें यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।

दिल्ली में शुभेंदु की बैठक और कोलकाता में फिरहाद की डैमेज कंट्रोल की कोशिश
दिल्ली में इस पूरी टूट की पटकथा केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर लिखी गई, जहां मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और पूर्व त्रिपुरा सीएम बिप्लव देब की मौजूदगी में 14 बागी लोकसभा सांसदों ने लंबी बैठक की। शुभेंदु अधिकारी दोपहर बाद भूपेंद्र यादव के घर से बाहर निकले। दूसरी तरफ, कोलकाता में इस टूट को रोकने के लिए ममता बनर्जी के सबसे विश्वस्त सिपहसालार और कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम को मैदान में उतारा गया।

फिरहाद हकीम अचानक बागी विधायकों के नेता और नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के घर उनसे मिलने विधानसभा पहुंचे। हालांकि इस मुलाकात को उन्होंने एक शिष्टाचार भेंट बताया, लेकिन ऋतब्रत बनर्जी के तेवरों से साफ है कि बात हाथ से निकल चुकी है। ऋतब्रत ने साफ कहा कि आज सुखेंदु शेखर बोले हैं, कल दूसरे बोलेंगे और वह उच्च सदन के कामकाज को लेकर रॉय के विचारों से पूरी तरह सहमत हैं।

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