26 Sep 2026

भारत सरकार द्वारा भारतमाला परियोजना अंर्तगत थनौद के पास कालम ब्रिज की अनुमति

भारत सरकार द्वारा भारतमाला परियोजना अंर्तगत थनौद के पास कालम ब्रिज की अनुमति

DB News
18 Jun 2026 06:58 PM
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35 करोड़ की लागत से 130मी. लम्बाई में पुल की स्वीकृति
-कलेक्टर श्री सिंह की पहल से मिली स्वीकृति से ग्रामीण हुए खुश
-प्रशासनिक तंत्र पर जनता का विश्वास हुआ सुदृढ़
दुर्ग। भारतमाला परियोजना के अंतर्गत थनौद क्षेत्र के स्थानीय ग्रामीणों व कृषकों की दीर्घकालिक और संवेदनशील मांग को संज्ञान में लेते हुए कलेक्टर अभिजीत सिंह के कुशल नेतृत्व और प्रयासों से शासन स्तर पर एक ऐतिहासिक सफलता अर्जित की गई है। थनौद में परियोजना से संबंधित कॉलम ब्रिज (पुल) के निर्माण की बहुप्रतीक्षित अनुमति भारत सरकार से प्राप्त हो गई है, जिसके तहत 35 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित लागत से 130 मीटर लंबे पुल की तकनीकी व प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इस वृहद सौगात से स्थानीय कृषकों और ग्रामीणों में हर्ष की लहर है और क्षेत्र के विकास को एक नई गति मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
       उल्लेखनीय है कि मार्च-2026 में स्थानीय कृषकों एवं ग्रामीणों द्वारा अपनी कृषि भूमि की सुगमता और आवागमन की सुरक्षा को लेकर प्रशासन के समक्ष अपनी व्यावहारिक चिंताएं और सुझाव साझा किए गए थे। मामले को गंभीरतापूर्वक लेकर कलेक्टर श्री सिंह ने संवेदनशीलता दिखाते हुए त्वरित व दूरदर्शी कार्रवाई की, जिसके तहत आंदोलनरत कृषकों और ग्रामीणों को स्वयं एनआईटी रायपुर ले जाया गया और शीर्ष तकनीकी विशेषज्ञों से उनका सीधा संवाद कराया गया। विशेषज्ञों ने ग्रामीणों को पुल के तकनीकी डिजाइन, उपयोगिता और सुरक्षा मानकों को विस्तार से समझाया, जिससे ग्रामीणों का संशय पूरी तरह दूर हुआ और इसके बाद ही सर्वसम्मति से एक मजबूत प्रशासनिक प्रस्ताव केंद्र सरकार को प्रेषित किया गया था। इस पूरी प्रक्रिया की अभूतपूर्व सफलता और ग्रामीणों की इस महत्वपूर्ण मांग को धरातल पर उतारने में कलेक्टर श्री सिंह के नीतिगत मार्गदर्शन की अहम भूमिका रही, जिनके प्रयासों से 35 करोड़ रुपये की बड़ी राशि और इस वृहद तकनीकी ढांचे की स्वीकृति अत्यंत अल्प समय में संभव हो सकी। इस कार्य ने प्रशासनिक तंत्र में जनता के विश्वास को और सुदृढ़ किया है। इस कॉलम ब्रिज की स्वीकृति प्राप्त होने के पश्चात अब शीघ्र ही निर्माण कार्य की आगामी रूपरेखा तैयार की जाएगी, जिससे भारतमाला परियोजना के साथ-साथ स्थानीय कृषकों के हितों का भी पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित हो सकेगा।

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